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कांट्रेक्टर एसोसिएशन ने चार सूत्रीय मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना दिया

आशीष परिहार कांकेर- छ.ग. कान्ट्रेक्टर्स एसोसिएशन जिला उ.ब. कांकेर के द्वारा विभिन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौपा । छ.ग. कान्ट्रेक्टर्स एसोसिएशन जिलाध्यक्ष आलोक तिवारी ने ज्ञापन सौपते हुए बताया कि गौण खनिज राॅयल्टी की छ.ग. शासन द्वारा राजपत्र में प्रकाशित दरेें एवं बाजार दर के द्वारा निर्माण ठेकेदारों को जो कटौती की जा रही है, जो कि व्यावहारिक नहीं है, प्रदेश सरकार के राॅयल्टी की दरों की कटौती ठेकेदारों के द्वारा स्वीकार्य है परन्तु बाजार दर अनुचित है, वर्तमान समय में स्टोन (मेटल) संड, सोली, मुरूम अगर बाजार दर से कटौती की जायेगी तो ठेकेदारों के द्वारा निर्माणाधीन कार्यों का घर बेचकर भुगतान करना पड़ेगा चूंकि भवन निर्माण में आरसीसी का रेट 4231 रूपये एम-3 घनमीटर एसओआर में दर है, अगर वह भवन 20 प्रतिशत कम दर में निर्माण हेतु निविदा ली गई है तो उस समय आरसीसी का रेट 3385 रूपये होगा,और इस गिट्टी का राॅयल्टी 520 एम-3 घनमीटर होगी, शेष 2865 रूपये में जीएसटी, आईटी लेबर वेल्फेयर सीमेंट और विभागीय नियम में शिष्टाचार इन तमाम कटौती के बाद ठेकेदार को 05 वर्ष का रख रखाव करना है कुल मिलाकर इस प्रकार की कटौती शासन द्वारा की गई है इस परिस्थिति में निर्माण करना संभव नहीं है। दूसरी तरफ रोड निर्माण में जीएसबी का एक मी-3 घनमीटर का रेट 1372 रूपये में 20 प्रतिशत कम दर में ठेकेदारों द्वारा अनुबंध किया है तो इसका 274 रूपये घटाने के बाद 1098 रूपये जिसमें 520 रूपये राॅयल्टी की कटौती, शेष 578 रू. जीएसटीआईटी लेबर वेल्फेयर और विभागीय शिष्टाचार के बाद निर्माण एजेंसी के पास कुछ भी नहीं बचता घर से पैसा लगाकर 05 वर्ष रखरखाव करना है, इसी तरह से मुरूम और रेत में इसी प्रकार की कटौती है इससे स्पष्ट होता है कि ठेकेदारों के भवन, रोड, ब्रिज एनीकट कैनाल का निर्माण करना संभव नहीं होगा ।
उन्होने आगे कहा कि लोक निर्माण विभाग में निर्माण कार्यों को रख रखाव हेतु 05 वर्ष की समय सीमा निर्धारित की गई है एवं जल संसाधन विभाग में 10 वर्षें का रख रखाव एनीकट बांध डेम में 10 वर्ष रखी गयी है जो पूर्णतः व्यवहारिक नहीं है, जिसे संशोधित किया जावे अथवा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और एडीबी द्वारा जो निर्माण कार्य करवाये जा रहे है उनमें रख रखाव हेतु विभागीय द्वारा भुगतान किया जाता है इस नियम को लागू किया जावे तथा निर्माण विभागों में तृतीय पार्टी चेकिंग की शर्ते निर्माण कार्यो में लागु की गई प्रदेश केे निर्माण ठेकेदारों की चेकिंग की शर्ते मंजुर है परन्तु चेकिंग की समय सीमा निर्धारण कर एवम निर्माण विभागों जो ठेकेदारों के भुगतान 5 प्रतिशत राशि एवं पीजी. की राशि की कटौती की जाती है हमारी शासन से अनुरोध है कि अतिरिक्त सुरक्षा निधी की राशि को थर्ड पार्टी चेकिंग में लाना अनिवार्य न किया जावे । प्रदेश में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ई-श्रेणी पंजीयन चालु की गई है। जिसमें बेरोजगार नव युवकों को इस श्रेणी में पंजीयन कराने 01 वर्ष में ब्लाॅक स्तर 50 लाख रूपयें तक की निर्माण करने की पात्रता होगी हम सभी ठेकेदार शासन के निर्णय का स्वागत करते है तथा प्रदेश में ग्राम पंचायतों में किये जाने वाले निर्माण कार्यो में निविदा प्रणाली लागू की जावे जिससें ई-श्रेणी बेरोजगार नवयुवको एवं ठेकेदारों कों कार्य करने का अवसर प्राप्त हो सके। परन्तु जिस प्रकार से बस्तर परिक्षेेत्र में 50 लाख तक का निर्माण कार्य में मेनुवल टेण्डर नियम लागु किया गया है किन्तु नगर पालिका, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जल संसाधन विभाग एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा आरईएस विभाग में मेनुवल टेण्डर के नाम पर आवेदन पपत्र आनलाइन माध्यम से डाउनलोड करवाया जाता है जिसे अन्य विभागों की तरह विभाग में कार्यालयीन समय में निविदा पत्र दिया जावे एवं उस नियम को आगे बढ़ाते हुए शासन से अनुरोध है दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर परिक्षेत्र एवं अम्बिकापुर परिक्षेत्र में लागु किया जावे, चुंकि छत्तीसगढ़ प्रदेश में 16000 रजिस्टर्ड ठेकेदार है जिनमें 80 प्रतिशत ठेकेदार 20-30 लाख का निर्माण कार्य करते है चुंकि ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति सही नही है उनके परिवारों का भरण पोषण उपरोक्त निर्माण कार्यो में निहीत था इसलिए 50 लाख के निर्माण मेनुवल आमंत्रत किये जाने की मांग की गई है । ज्ञापन सौपने वालों में प्रमुख रूप से जिलाध्यक्ष आलोक तिवारी, ध्यान चन्द्र केवलरमानी, प्रकाश जोतवानी गोल्डी, रूपेश्वर ठाकुर, रवि यादव, छात्रप्रताप देव दुग्गा, प्रदीप साहू, रूपेश जैन, द्वारका सोनी, पियुष कश्यप, निरंजन ठाकुर, जयंत अटभैया, दीपक शर्मा, पुरूषोत्तम पाटिल, मुकेश तिवारी, सहित बड़ी संख्या में उपस्थित थे ।

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